देखो मां का दरबार सजा है
स्वागत करने संसार खड़ा है
 देर ना कर अब आ जाओ मां
भक्तों को दरश दिखा जाओ मां

एक बार मां आ जाओ
बेटी को सीने से लगा जाओ
मोह माया में फंसी पड़ी हूं
आ कर नैया पार लगा जाओ 

कोई ना मेरा सिवाय तुम्हारे 
तू ही भक्तों की बिगड़ी संवारे
क्या भेट करू कुछ ना पास हमारे  
हरदम जीव्हा तेरा नाम उचारे

रूप अनोखा कर सोलह श्रृंगार
देखो आईं मां हो शेर पर सवार 
सूरज सा तेज चन्द्रमा सी शीतलता
जो देखे तुझको बारम्बार निहारता 

 संताप सबके हर लो मां 
झोली खुशियों से भर दो मां
अंधकार मय सारा संसार है
आकर उजाला कर दो मां ।।
नेहा धामा " विजेता " 
बागपत , उत्तर प्रदेश