इस खुदगर्ज सी दुनिया में
बहुत मुश्किल है एक बेटी का होना
हर कदम पर होती है इम्तेहाँ ज़माने की कयी
संघर्षो से भरी होती है ज़िन्दगी का सफर...!!
फर्क सुरु होजाता है दुनिया में आते ही
कोसने लगते है दुनिया उस माँ को भी
हर ताने सह कर करती है परवरिश बेटी की
ढाल बनकर आसान बनाती है एक बेटी की सफर....!!
ऐसी कयी माँये है जो ठुकरा दी ज़माने ने
क्या बेटी होना गुनाह है कोई इस मतलबी ज़माने में
हर सितम सह कर भी मुस्कुराती है फूलो सी
हँस कर अपना लेती है काँटों से भरी ये ज़िन्दगी का सफर...!!
खुद बहुत महान मानते फिरा करते है
एक माँ गुड़िया को सता कर ये जमाना
कितने बेरहम होते है जिसने कभी ये महसूस नहीं किया
की कितनी तकलीफो से गुजरती होंगी उस माँ की मन....!!
खाते है सौ सौ कसमे जो दुनिया के सामने
भूल जाते है हर वादे पढ़ते ही कदम दहलीज़ पे
करते रहते है हर जुर्म फिर भी जुबाँ से कुछ नहीं कहती
क्यूँ कर देते एक सज़ा जैसे उस मासूम ज़िन्दगी का सफर...!!
जाने कब इस समाज से ये जुर्म खतम होंगी
दहेज के नाम पर बेटों को बेचना ये रसम कब खत्म होंगी
कब याद करेंगी दुनिया हर किसीके समान होती है ज़िन्दगी
जाने कब बदलेंगी ये प्रथा जहाँ से होंगी आसान बेटियों की ज़िन्दगी का सफर....!!
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नैना.... ✍️✍️

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