प्रेम है अनंत
अटूट और अथाह सत्य
प्रेम के अनेक रूप
कभी कृष्ण और राधा सा
ना मिलकर भी जग प्यारा सा
कभी कृष्ण और सुदामा सा
सच्चे दोस्त के अनुराग सा
प्रेम है अनमोल
प्रेम ही सत्य है
जैसे राम और सीता का
पवित्र बंधन सा
कभी राम और हनुमान का
भगवान और भक्त का
प्रेम में नहीं छल कोई
ना कोई कपट छुपा
जैसे मीरा का कृष्ण से
प्रेम की कोई मांग नहीं
प्रेम है पूर्ण समर्पण सा
शब्दों का स्थान नहीं
मन के सम्बन्ध सा
फूलों की खुशबू सा
बारिश की बूंदो सा
प्रेम है अनंत स्वरुप
सच्चा प्रेम सौभाग्य सा
भटकती राह में सुकूँ सा
प्रेम है अटूट बंधन
प्रेम ही अथाह सत्य सा
निकेता पाहुजा ✍️

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