सर्द रात थी ,गांव में एक जगह अलाव के पास कई लोग इकट्ठा था,चर्चा ,परिचर्चा ,गांव से लेकर देश तक की चल रही थी।
तभी पंडित जी भी चौराहे से साइकिल से  आ रहे थे।हरिया ने कहा _आओ पंडित जी जड़ा गए होगे ,तनिक हाथ पैर सेंक लो।
पंडित जी साइकिल से उतर गए ,लोगों ने उनको बैठने के लिए जगह दी।
पंडित जी के आने से चर्चा उनकी तरफ मुड़ गई।हरिया ने पूछा _का बात है पंडित जी बड़े दुखी लग रहे हो?
अरे कुछ नहीं यजमान ,पत्नी बीमार है ,और बिटिया की शादी टूट गई।
क्या?????
सबने एक साथ कहा?
भीखू चौंका ,फिर कुटिलता से बोला क्यों पंडित कुंडली नहीं देखी थी।
देखी थी !_ पंडित जी ने दुखी स्वर में कहा।
फिर.........।
हमारी और दुलारी की शादी तो तुमने तोड़ दी थी कि इनके तो 17 ही गुण मिलते हैं।
पंडित जी चुप थे।
भीखू इतने पर भी नहीं रुका _उसने कहा और पंडित जी पंडिताइन पर कोई ग्रह तो वक्र नहीं ,पूजा पाठ करके निपटाई देव,पंडिताइन ठीक होई जाएंगी।
पंडित जी शांत रहे ,फिर साइकिल उठाई और घर की तरफ चल दिए।
दोष इन्हीं पंडित जी का नहीं है,ये थोड़ा पढ़ लिख अपनी दुकान खोल देते हैं।आम जनमानस कुछ सही कुछ गलत के चक्रव्यूह में फंसा इनके चक्कर में ताता थैया करता रहता है।
ज्योतिष एक विज्ञान है,जिसका प्रयोग पुराने समय से होता आ रहा,ज्योतिष और खगोल शास्त्र में भारत का दुनिया में अतुलनीय योगदान रहा है।
लेकिन इसका नाम खराब करने वाले न जाने कितने अल्पज्ञ पंडित अपनी रोजी रोटी की दुकान खोले बैठे हैं।
अलाव की आग ठंडी हो चुकी थी ,लेकिन पंडित जी के प्रति बढ़ता अविश्वास गर्मी से रहा था।