सिक्ख धर्म के 9वें गुरु हैं,श्री गुरु तेग बहादुर।
एक अप्रैल 1621 को जन्मे धरती पे बहादुर।

गुरु हरिगोविंद और माता नानकी की संतान।
धर्म पत्नी माता गुजरी गुरु गोविंद जी संतान।

अमृतसर में जन्म लिया था ऐसा वीर बहादुर।
धर्म सुरक्षा के खातिर जीवन किया न्योछावर।

अपने ज्ञान शौर्य त्याग से भारत को है बचाया।
ऐसे गुरु महान का 401वां पर्व आज है आया।

पीएम मोदी जी ने बिना सुरक्षा गुरुद्वारा धाया।
गुरुद्वारा शीश गंज दिल्ली जाकर सर झुकाया।

प्रेम भाईचारा एकता शांति क्षमा सहनशीलता।
ये थे सन्देश गुरु के जीवन भर रही धर्मशीलता।

पिता के साथ मिलके भांजी बचपन से तलवार।
जीवन में जौहर दिखलाये चला अपनी तलवार।

त्याग करुणा एवं निर्भयता के थे जीवंत प्रतीक।
सिक्ख गुरुओं में अद्वितीय तेग बहादुर निर्भीक।

औरंगज़ेब ने गुरु तेगबहादुर के सामने शर्त रखी।
गुरु संग थे सिक्ख शहीदभाई दयाला मती सती। 

मुगलिया हुकूमत की क्रूरता देखे रहेलोग इकट्ठा।
हिंदुस्तानी हिंदुओं का एवं सिक्खों का यह पट्ठा।

शर्त रखी औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर के सामने।
मुस्लिम धर्म स्वीकारा ना अड़े रहे धर्म के सामने।

खुद चलके आए औरंगजेब लाल किले से खास।
पहुँचा वहाँ है सुनहरी मस्जिद के काजी के पास।

वहीं कुरान की आयत पढ़ा यातना फतवा जारी। 
जल्लाद ने गुरु तेगबहादुर पे तलवार चला डारी।

औरंगज़ेब ने तेगबहादुर पे बड़ा अत्याचार किया।
24नवंबर1675में शीशगंज में शरीर त्याग दिया।

गुरु तेगबहादुर के हिम्मत हौसले से धर्म है जिंदा।
औरंगजेब की हरकत गंदी  इसकी करूँ मैं निंदा।

सिक्ख गुरु तेगबहादुर को मेरा है शत शत नमन।
शहीद दिवस कोटि-2 नमन श्रद्धांजलि देता मन। 

हिंदुस्तान में हिंदुओं के अस्तित्व में रहने के दिन।
हिन्द की चादर बने गुरु तेगबहादुर इससे है दिन।

वाहे गुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फ़तह।
विनम्र श्रद्धांजलि  देता आपको श्रद्धा सुमन यह।

रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.