दीदी ! मुझे भी उस पार जाना है । देखो ना दीदी ! उन्होंने कितने साफ कपड़े पहने हैं और हमने इतने गंदे । उस तरफ मेरी ही उम्र के बहुत सारे बच्चे खड़े हैं और वह देखो ! आपकी तरह हीl वहां पर कई दीदी हैं जो सफेद कपड़े पहनकर खड़ी उस आदमी की बातें सुन रही है साथ में सब बच्चे भी उस आदमी की बातें सुन रहे हैं । नन्हे मोनू ने अपनी बड़ी बहन मुन्नी से कहा ।
नन्हे मोनू की बातें सुनकर उसकी बड़ी बहन मुन्नी ने कहा :- हाॅं ! मैं देख रही हूॅं और ऐसा मैं पहली बार नहीं देख रही हूॅं । इससे पहले भी मैंने कई मर्तबा इन जैसे और भी बच्चों को देखा है। तुझे मालूम है मोनू ! आज से ५ साल पहले मैं इसी जगह पर बाबा ( पिता ) के साथ खड़ी थी । मैंने बाबा से कहा था कि मुझे भी इन बच्चों जैसे साफ सफेद कपड़े पहनने है तो बाबा ने ही मुझे बताया था कि यह एक प्राइवेट स्कूल है और इन बच्चों ने जो साफ़ सफेद कपड़े और जूते पहने हैं वें इनके ड्रेस है । यहाॅं पर यें सभी बच्चे पढ़ने आते हैं ।
हम भी तो इन्हीं बच्चों जैसे हैं हम क्यों नहीं पढ़ने आते ? अपने छोटे भाई मोनू की निश्चल बातें सुनकर मुन्नी की ऑंखों में ऑंसू छलक आए । अपने ऑंसूओं को अपनी झूठी मुस्कान में तब्दील करते हुए मुन्नी ने अपने सर पर रखें सामान की टोकरी को नीचे जमीन पर रख दिया और अपने छोटे भाई मोनू की तरफ देखते हुए कहा :- इन बच्चों के माता - पिता हमारे माता - पिता की तरह गरीब नहीं है ... मजदूर नहीं है । यें सभी जो तुम बच्चे देख रहे हो उनके बाबा के पास बहुत पैसे हैं लेकिन हमारे माॅं - बाबा के पास तो पैसे बिल्कुल भी नहीं है । हमारे माॅं - बाबा दिहाड़ी मजदूर हैं और वें दोनों जिस दिन काम ना करें उस दिन हमें खाना तक नहीं मिलता है तभी तो मुझे भी अपने माॅं - बाबा की मदद करनी पड़ती है ताकि हमारे हाथ में कुछ पैसे आए और हमें सुबह - शाम खाना मिल सके ।
दीदी ! आप माॅं - बाबा की मदद करती है और मैं भी तो आपकी मदद करता हूॅं । आपके साथ - साथ हर समय रहता हूॅं । आप जहाॅं भी इन टोकरी में रखे सामानों को बेचने जाती है मैं आपके साथ ही तो रहता हूॅं । अपने छोटे भाई मोनू की बात सुनकर मुन्नी उसे गले लगा लेती है ।
मोनू अपनी दीदी मुन्नी के गले लग जाता हैं और गले लगे ही उससे कहता है :- दीदी ! कई दिनों से हम जब इस रास्ते से गुजर रहे थे तभी मेरे मन में यह इच्छा जगी थी कि हम दोनों ही इस कंटीली तारों के उस पार जाए और उसके अंदर की दुनियां देखे । आज भी मेरे रुकने के बाद ही आप यहां पर रुकी थी और आप ही ने अभी बताया कि यह स्कूल है जिसमें हमारे जैसे बच्चे पढ़ते हैं । आपकी बातें सुनकर मेरी भी इच्छा हो रही है कि मैं भी इस स्कूल में पढ़ूं । इन बच्चों को देखकर क्या आपके मन में इच्छा नहीं हो रही कि आप भी इस स्कूल में पढ़े ?
मोनू की बातें सुनकर मुन्नी के भरे जख्मी ताजा हो गए और उसने गोलू के दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर कहा :- मैंने अपनी इच्छा को ३ साल पहले ही दफन कर दिया है । जानते हो मोनू ! जब मैंने बाबा से इस स्कूल में पढ़ने की अपनी इच्छा बताई थी तो उन्होंने कहा था कि हम इतने गरीब है कि तुम्हें पढ़ा नहीं सकते । बाबा ने उस दिन मुझे यह समझाया कि गरीबी हम जैसों के लिए कितना बड़ा अभिशाप है। हमें अपनी इच्छाओं का गला घोंटना पड़ता है । जहाॅं हमारी उम्र के बच्चे पढ़ते हैं वहीं पर हमें काम करना पड़ता है ताकि हमें दो वक्त की रोटी मिल सके और हम अपना पेट भर सके लेकिन इन सबके बावजूद मैं तुम्हारी इच्छा का गला किसी को भी नहीं घोंटने दूंगी । तुम्हें याद है एक दिन हम अपना सामान बेचने एक मास्टरनी जी के घर पर गए थे ? उन्होंने हम दोनों को देखकर हमसे पूछा भी था कि तुम दोनों किसी स्कूल में पढ़ते हो ? मेरे ना कहने पर उन्होंने मुझे बताया था की वह हमारा दाखिला अपने स्कूल में करवा देंगी और इस तरह हम दोनों पढ़ने लगेंगे । उस दिन उन्होंने पढ़ाई के बारे में बहुत सारी बातें बताई थी और तो और वह कह रही थी कि अगर हम पढ़ - लिख जाएंगे तो इस गरीबी से हम बाहर भी निकल सकते हैं लेकिन मैं अगर स्कूल जाने लगी तो माॅं - बाबा की मदद कौन करेगा ? तुम्हारी इच्छा जानकर अब मैं चाहती हूॅं कि तुम स्कूल में जाकर पढ़ो और पढ़ - लिखकर बड़े आदमी बनो और हमें इस गरीबी के दलदल से निकालो । मैं आज ही बाबा से बात करती हूॅं । मुझे उम्मीद है कि बाबा मेरी बात नहीं टालेंगे । अब तो तेरी इच्छा मेरे स्वप्न बनेंगे और इस स्वप्न को पूरा करने के लिए अगर मुझे बाबा से लड़ना भी पढ़ें तो मैं लड़ जाऊंगी लेकिन तुम्हें स्कूल भिजवा कर ही रहूंगी । इस स्कूल में ना सही लेकिन तुम्हारा दाखिला सरकारी स्कूल में करवाकर रहूंगी ।
अपनी बड़ी बहन की बात सुनकर मोनू की ऑंखों में भी स्कूल में पढ़ने के सपनों ने दस्तक देनी शुरू कर दी थी । उसकी गोल - गोल कंचे जैसी ऑंखें चमकने लगी थी । उसने अपनी बड़ी बहन मुन्नी की तरफ देखते हुए मन ही मन में कहा कि आपके स्वप्न मैं जरूर पूरा करूंगा और एक दिन बड़ा आदमी बन कर माॅं - बाबा और आपको इस गरीबी के दलदल से निकाल कर रहूंगा और साथ ही मेरी एक कोशिश और रहेगी कि जिस इच्छा को आपने अपने मन के भीतर दफन कर दिया है उस इच्छा को मैं एक - ना - एक दिन अवश्य पूरा कर सकूं ।
अगले ही पल मोनू और उसकी बड़ी बहन मुन्नी एक - दूसरे का हाथ थामें अपने पथ पर आगे बढ़ रहे थे । दोनों की ऑंखों में ही एक - दूसरे के लिए एक स्वप्न था जिसे वे दोनों एक - दूसरे के लिए पूरा करना चाहते थे ।
✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻 समाप्त ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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