जन का संताप मिटाना है ..
बूझे नहीं कोई चुल्हा
हंसता बालक.सम हो प्रसून..
आशीर्वचनों से गुरु जन के..
प्रफुल्लित हो हर अंतर्मन..
निरक्षरता का हो अंत..
"मुद्दा" ये बनता है ज्वलंत..
हो अस्त्र बने लेखन-पुस्तक
हो श्वांस रहे, सीखे तबतक..
मिट जाए भीषण छल-प्रपंच
प्रतिशोध मिटे , पल में अनंत..
सोशल डिस्टैंसिंग बनी रहे..
उर से कोई डिस्टैंस न हो..
"दधीची" का अनुसरण करें
मानव पर आये संकट जो..
हो राष्ट्र प्रेम का अवसर जो
संपूर्ण समर्पण करना है..
इक ऐसा दीप जलाना है..
जन का संताप मिटाना है..!

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