हुई शादी धुम धाम से, उमड़ा प्यार परवान से, 
नए लोग  नए रिश्ते  नया घर, सब मिला
किसी ने की तारीफ किसी ने बोलीं बोली
    सास ननदो ने भी आपना काम किया  तानो से मारी गोली 
पति मोहदय ने भी साथ दिया सुना दी मुझे बोली
आती मायके की याद बहुत, ओढ़े रहती थी प्यार कि खोली
     माँ, पापा को सोच के सब कुछ सह जाती 
    सोचती काश होते पंख तो उड़ जाती
दिन बीतते गए  मै टुटती गई 
खुशियाँ लेकर आई नन्ही सी गुड़िया 
पर  किसी के लिए न थी वो कुछ, 
मेरे लिए तो थी जादू की पूडी़या
सब कुछ भुल के उसे सवारने लगी धिरे धीरे वो बड़ी होने लगी, 
देख के सब कुछ समझने लगी , मुझे भी समझाने लगी
माँ कब तक सहोगी कोई नहीं मान तुम्हारा, 
न कोई सम्मान, इस घर को अपना माना, 
पर अपनों ने न माना अपना, 
बिटिया ने हक दीलाया, कानून हो गई सबसे अलग 
अब दो लोगों की दुनिया है , प्यारा सा है आशियाना 
तलाक के बाद पता चला कि हु क्या मैं 
 सुकून भरी जिंदगी मेरी मिश्री सी
 लेकिन घुलती है मिठास फिकी सी , 
हमेशा मन रहता खालीसा क्यू की हु मैं तलाक शुदा, 
तो क्या हुआ अब तो मैं खुद ही हु एक पहेली सीll