आम्रपाली की कहानी की शुरूआत वैशाली नगर से होती हैं वर्तमान में बिहार (भारत) में स्थित हैं। वैशाली वह नगर हैं जिसने सम्पूर्ण विश्व को सबसे पहले गणतंत्र का पाठ पढ़ाया था। इस क्षेत्र पर शासन करने वाले राजा महाराजाओं के साथ असीम सुंदरता की धनी नगरवधू आम्रपाली की कहानी इतिहास के पन्ने रंगे हुए हैं।

आज से लगभग 25 सौ वर्ष पूर्व एक गरीब दंपत्ति को आम के पेड़ के नीचे एक मासूम कन्या मिली। इसको यहां कौन छोड़ गया, इसका कुछ भी पता नहीं था। लावारिस रूप में मिली इस मासूम और सुंदर कन्या को महनामन नामक एक सामंत ने पेड़ के नीचे से उठाया और अपने घर ले गया।

क्योंकि यह आम के वृक्ष के नीचे पड़ी मिली थी इसलिए इसका नामकरण उस सामंत ने आम के नाम पर ही “आम्रपाली  रखा गया। आम्रपाली  जब युवावस्था में पहुंची तो वैशाली नगर के सभी युवक उससे शादी करने के लिए तड़पने लगे। आम्रपाली के माता पिता के पास रोज सैकड़ों रिश्ते आने लगे। आम आदमी से लेकर राजा महाराजा तक। एक छोटा सा काम करने वाले व्यक्ति से लेकर व्यापारी तक, हर कोई आम्रपाली को पाना चाहता था 
आम्रपाली के माता पिता के लिए यह बहुत ही दुविधापूर्ण और संकट का समय था क्योंकि अगर वह किसी एक को आम्रपाली के लिए चुनते तो वैशाली नगर में अशांति फैलने का डर था।

आम्रपाली को जब कोई एक बार देख लेता तो फिर उसकी नजर नहीं हटती, इतना ही नहीं इसके बाद वह किसी अन्य स्त्री में दिलचस्पी नहीं लेता था। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम्रपाली कितनी सुंदर थीआम्रपाली के माता पिता उसके विवाह को लेकर चिंता में पड़ गए क्योंकि वह किसी से भी दुश्मनी नहीं करना चाहते थे। आम्रपाली की सुंदरता और विवाह से संबंधित समस्या का निराकरण करने के लिए वैशाली में एक बहुत बड़ी सभा का आयोजन किया गया।

इस सभा में हजारों की संख्या में युवाओं ने भाग लिया, जो आम्रपाली से विवाह करना चाहते थे। इतनी बड़ी मात्रा में एक साथ युवाओं को देखकर वैशाली गणतंत्र की सभा में यह निर्णय लिया गया की आज से आम्रपाली किसी एक की ना होकर संपूर्ण वैशाली नगर की नगरवधू घोषित की जाती है।

ऐसा करने के पीछे मुख्य कारण वैशाली गणतंत्र की एकता और अखंडता को बनाए रखना था। अगर किसी एक के साथ आम्रपाली का विवाह किया जाता तो ऐसा अंदेशा था कि राज्य में अशांति फैल जाती, क्योंकि अब आम्रपाली नगरवधू बन गई अतः हर कोई स्वतंत्रता के साथ उसे प्राप्त कर सकता था।
इस तरह का निर्णय आम्रपाली को आजीवन नगरवधू और उसके पश्चात राज दरबार की नर्तकी बना कर छोड़ दिया।इतना ही नहीं आम्रपाली के लिए एक बहुत बड़े और खूबसूरत महल की व्यवस्था की गई जिसमें उसकी सेवा करने के लिए दासियों को भी लगाया गया। आम्रपाली के महल में सभी सुख सुविधाएं थी लेकिन उसके ऊपर लगा सबसे बड़ा कलंक अमिट था।

वैशाली नगर में एक नगरवधू का जीवन यापन कर रही आम्रपाली के जीवन के अंतिम समय में ऐसा पड़ाव आया जिसने उसके जीवन को पूर्णतया बदल दिया। यह घटना उस समय की है जब आम्रपाली भगवान बुद्ध के संपर्क में आई और उनके प्रवचन सुने। आम्रपाली और बुद्ध का संबंध एक गुरु और शिष्य का था।

एक दिन आम्रपाली महल में आराम कर रही थी तभी उनके द्वार पर एक भिक्षुक भिक्षा मांगने के लिए आया। जब भिक्षा देने के लिए वह दरवाजे पर आई तो उस भिक्षुक को देखते रह गई। उस भिक्षुक के प्रति आम्रपाली के मन में प्रेम उमड़ आया। शायद यह वह क्षण था जब पहली बार आम्रपाली और बुद्ध का सम्बन्ध स्थापित हुआ.

उस भिक्षुक के पीछे बहुत सारे भिक्षुक थे जिन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि वह भिक्षा मांगने के लिए आम्रपाली की चौखट पर आए हैं। क्योंकि वैशाली नगर के रहने वाले भिक्षुक आम्रपाली को हीन भावना से देखते थे।

भिक्षा देने के पश्चात् आम्रपाली ने भिक्षुक से आग्रह किया कि कुछ ही दिनों में वर्षा ऋतु प्रारंभ होने वाली है, मेरा आपसे आग्रह है कि इस समय अवधि में आप मेरे महल में ही ठहरे।

इस आग्रह के प्रत्युत्तर में युवक ने कहा कि इसके लिए मुझे अपने स्वामी अर्थात महात्मा बुद्ध से अनुमति लेनी होगी, अगर इसके लिए वह सहमत हैजाएंगे तो मैं यहां रुक जाऊंगा।जब यह बात महात्मा बुद्ध के पास पहुंची तो महात्मा बुद्ध ने अन्य शिष्यों से कहा कि अभी वह वहां पर रुका नहीं है, उसे रुकने के लिए मेरी अनुमति की जरूरत है और वैसे भी बिना मेरी अनुमति के वह वहां पर नहीं रुकेगा।

आम्रपाली की चौखट पर भिक्षा मांगने गया युवक जैसे ही लोटा सबसे पहले महात्मा बुद्ध के पैर छुए और उन्हें सारा वृत्तांत सुनाया। इस पर बुद्ध ने उस भिक्षु से कहा कि तुम वहां पर रह सकते हो।

भगवान बुद्ध के इस निर्णय से अन्य भिक्षुक स्तब्ध रह गए, उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि बुद्ध इस तरह का निर्णय ले सकते हैं। बुध से आज्ञा लेकर वह भिक्षु आम्रपाली के महल में चार माह रहने के लिए चला गया। तभी बुद्ध ने अन्य भिक्षुओं को आदेश दिया कि तुम अपनी दिनचर्या का पालन करो, मुझे उस पर पूरा यकीन है कि उसके मन में अब कुछ इच्छा नहीं है।

यदि उसे वहां पर रहने के लिए आज्ञा नहीं दी जाती तो उसको आघात पहुंचता क्योंकि उसका मन निर्मल है और मुझे पूरा यकीन है कि वह आम्रपाली से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होगा। जहां तक मैं उसे जानता हूं उसका धम्म अटल है और वह आम्रपाली के सामने समर्पण नहीं करेगा।

इतना ही नहीं एक भिक्षु के लिए यह परीक्षा का समय है कि वह कितना अटल रह सकता है। हम सबको 4 महीनों का इंतजार करना पड़ेगा और यकीनन वह मेरे विश्वास पर खरा उतरेगा और लौट आएगा।वर्षा ऋतु चली गई इसके साथ ही वह भिक्षुक महात्मा बुद्ध के पास लौट आया। अन्य भिक्षुओं ने देखा कि उसके पीछे पीछे आम्रपाली भी बुद्ध की शरण में आ गई।  

रंजना झा