मुझे आज मुक्ति मिली, 
रुक गयीं सांसे मेरी,
ख़त्म हुंई झंझटे सारी,
उड़ चला मैं,
उन्मुक्त नीले आकाश में,

हो गयीं पूरी अब सारी,
जिम्मेदारियां,
रखा है क्या अब इस,
नश्वर संसार में,
उड़ चला मैं, 
उन्मुक्त नीले आकाश में,

बेटे बेटियों का बस गया,
घर संसार,
रम गये हैं बच्चे अब,
अपने संसार में,
उड़ चला मैं,
उन्मुक्त नीले आकाश में,

अपना अपना सब कहते,
पर न कोई अपना,
उम्र अच्छी पा ली मैंने,
रहा न कोई सपना,
उड़ चला मैं,
उन्मुक्त नीले आकाश में,

न बीमारी न कोई झंझट,
न घिसटना मुझे,
संतोषी सदा सुखी जीवन,
पाया मैंने अविचल,
उड़ चला मैं,
उन्मुक्त नीले आकाश में,

उड़ चला है जीव अब ये,
छोड़ काया अपनी,
गिरिवर शिखरों को लांघ,
रुह बन कर अपनी,
न जाने किस दुनिया में,
उड़ चला मैं,
उन्मुक्त नीले आकाश में,
मुझे आज मुक्ति मिली ।

     काव्य रचना-रजनी कटारे
          जबलपुर ( म.प्र.)