मेरे स्कूल न जाने पर पिता की वो पिटाई...आज भी याद है।।
उसके बाद उनकी आंखें थी जो छलक
आई... आज भी याद है।।
जब उन हाथों पे रखी थी मेरी पहली कमाई...आज भी याद है।।
फिर से एकबार उनकी आंखें थी छलक आई...आज भी याद है।।
मौलिक व स्वरचित:- कीर्ति रश्मि "नन्द( वाराणसी)
छायाचित्र :- साभार गूगल

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