तुम्हारा कंधा हो और हमारा सिर हो,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
तुम्हारे साथ ही मेरा अस्तित्व हो,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
सुकून के दो पल,चाय की दो प्यालियाँ,
उलझे हुए खुद में जैसे दो डालियां,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
समेट कर लाएंगे सारे रंज और गम,
देखना फिर भी कितना मुस्कुरायेंगे हम,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
बताओ कैसे कर पाओगे दूर तुम दूरी का गम,
क्या हांथो में थाम पाओगे ये आंखे नम,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
तुम देखना जल्द ही वो पल आएंगे,
जब देखकर एक दूसरे को हम दोनों मुस्कुरायेंगे,
बस उस दिन का इंतज़ार करेंगे हम।
इंदु विवेक उदैनियाँ
(स्वरचित)
जालौन (उत्तर प्रदेश)

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