माँ..
माँ तेरी ममता अनमोल
माँ तेरी छाँव का सुःख अनमोल
माँ मेरा वर्चस्व तू
माँ मेरा सर्वस्व तू..
तेरी ममता का कोई ना छोर
तेरे जैसा ना कोई और
नदी सी शीतलता तुझमें
रेगिस्तान सी गर्मी भी तू
समेट ले माँ अपने आँचल में मुझे,
ज़िन्दगी के थपेड़ो में तुम ठंडी छाँव माँ
आज वो बचपन वाली
थपकी दे जाओ ना माँ,
तेरी ममता अनमोल है माँ
तुझ जैसा कोई और नहीं है माँ,
खुद दर्द सहती हो
मुझको सुःख देने की खातिर
तेरा ये क़र्ज़ कैसे चुकाऊं माँ
तेरी ममता है अनमोल माँ
उलझी हूँ अनगिनत उलझनों में
सब उलझनों की बस एक तू ही सुलझन है माँ
खुद गीले में सोकर
मुझे सूखे में सुलाया तूने
तेरी ममता की छाँव में
मुझको संवरना है माँ
तरसी हूँ तेरी गोद को
एक बार गोद में सुला
फिर से थपकी दे दो ना माँ..
तेरी ममता की गोद में
मुझको झपकी लेनी है माँ
तेरी ममता अनमोल माँ
तेरी ममता का कोई छोर नहीं माँ
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर उत्तराखंड

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