याद आती अब बचपन की दुनिया
जहाँ नहीं थी कभी कोई कमियाँ
खेल और मस्ती संग करते पढ़ाई
आज हो ही गई इन सबसे दूरियां

निन्यानवें के फेर में पड़ गए सभी
बचपन हो गया था जैसे अजनबी
पाई पाई का लगे हैं हिसाब लगाने
बचपन में ऐसा सोचा ना था कभी

माँ की ममता और पापा का दुलार
ढूंढ रहे बचपन कहाँ गया वो यार
दुनिया मेरी अब सिमटती जा रही
बचपन में बना रखा था जो संसार

बचपन की दुनिया याद अब आती
अक्सर यादें उसकी बहुत सताती
लौट आये फिर बचपन की दुनिया
आज भी हर इंसान को वो भाती

🖋️ रवि गोयल