गर्मी की छुट्टियों में दादी-नानी की कहानियां थी,परियों और जादूगरों का फ़साना था,
बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!!

बारिशों में कागज़ की नाव थी तो सर्दियों में मुँह से धुंआ निकाल कर कश लगाना था!!

गर्मियों में आम के पेड़ पर चढ़कर कच्चे आम बगीचे से लूटने का अपना ही ज़माना था!!

बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!!

नवरात्रों में कन्याभोज में शामिल होकर सबसे ज्यादा पैसे इक्कठे करने की होड़ मचाना था!!

मेहमानों के अचानक से घर आ जाने पर मिठाइयों और पकवानों पर ललचाती नज़रों से अपनी बारी का इंतजार करना था!!

बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!!

दुनियां का सबसे हसीन और खूबसूरत पल बचपन ही होता है
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर यही तो बचपन का मंत्र होता है!!

ना आज की चिंता थी ना थी कल की कोई फिकर कट्टी और बट्टी में ही हो जाती थी शामों- सहर!!

बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!!

14 नवम्बर को करते थे चाचा नेहरू जी का बर्थडे सेलिब्रेट
पूरे स्कूल में उत्सव का माहौल हो जाया करता था क्रिएट!!

ख़ुद के जन्मदिन का रहता था हमें तो साल भर वेट 
नए-2 कपड़े और खिलौनों का कितना रहता था क्रेज़!!

अच्छे से याद है मुझे जब मैंने पहली बार सायकिल चलाई थी
मुँह के बल गिरे थे हम हाथ पैरों में खूब चोट आई थी!!

अब कभी न सायकिल चलायेंगे ये ख़ुद से कसम खायी थी

लेकिन क्या कभी बचपन के कसमें वादे याद रखे जाते हैं

कुछ ही पलों में मस्तानों की टोली ने जो टेर लगायी थी
भूल के सारे दर्दो ग़म ,
हमने अपनी साइकिल ख़ूब दौड़ायी थी!!

बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!!

क्या दिन थे वो भी बचपन के सुहाने ,तब बड़े होने की जल्दी थी और अब बचपन में बापिस जाने के याद आते है अफ़साने!!

काश के फिर से लौट आये वो बचपन के प्यार भरे दिन
और हम फिर से पा जाएं अपने माँ - बाप का वो लाड़ प्यार और वो पल छीन!!

आप सभी को बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मेरी ये रचना आप सभी के बचपन को समर्पित 🙏🙏

एकता श्रीवास्तव ✍️