वो बन संवर कर महफिल में शमा जलाने आए,
वो अब मेरे दिल की दहलीज पर नया जख्म लगाने आए।
उन मीठे सौंधे जख्मों से उभर ना पाया दिल अभी,
फिर भी वह आज नए जख्मों पर मरहम लगाने आए।
मेरी वीरान सी जिंदगी में खुशबू फैले अगर,
वो मेरे घर के दरों-दीवार सजाने आएं,
इसी गली में उनके कई  मित्र बसते हैं,
वो किसी और को मिलने के बहाने तो आएं।
ए खुदा रखना रहमों करम इस दिल पर,
कोई मुझे इन सुनहरे ख्वाबों से ना जगाने आए।

प्रिया धामा
भिलाई, छत्तीसगढ़