क्यों मां क्या तेरा और
पापा का अलगाव जरूरी है
झूठे अंहकार के लिए
यूं बिखर जाना जरूरी हैं
बात तलाक तक पहुंच गई
ऐसी क्या मजबूरी है
मेरा और भाई का क्या होगा
एक बार भी सोचा नहीं
खुदगर्जी में अंधे हो कर
क्यों भूले हमें इस कदर
छुड़ा कर हाथ चली आई
पलटकर देखा भी नहीं
पापा से तो कुछ बोल ना पाते
तुझ से दिल की बातें कह जाते
मैं यहां तेरे पास भाई वहां
पापा के संग कैसे रहें
दूर रहकर सो ना पाते
खाना खाने बैठे पापा और
भैया की याद आएं
भाई भी वहां हमारी याद
में एक निवाला भी ना खाएं
तुम दोनों ने प्यार से कभी
जो आशियाना बसाया था
छोटी छोटी खुशियों के
फूलों से महकाया था
टुकड़े टुकड़े हो गया
बिखरकर खंडहर बन गया
झूठे अहम के कारण क्यों
हम से मैं हो गए
जब हमारा कोई वजूद नहीं था
क्यों इस दुनिया में लेकर आएं
तोड़ने ही थे अरमान हमारे
क्यों इतने लाड लड़ाए
रोक दो हमारे लिए इस
तलाक को , छोड़ दो हमारे
लियें झूठे अभिमान को
क्यों ना हम सब मिलकर
फिर से अपना घरोंदा बनाएं
हंसी खुशी संग जीवन बिताएं ।।
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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