आज के रिश्ते
क्यों हो चले कमज़ोर से
पल भर में हो जाते है बेसब्र से,
ना निभाने की समझ
ना परिपक्वता, बस क़ानून ही लगे इन्हे रिश्तों से आजादी की सीढ़ी,
विवाह बंधन है अनमोल,
मन समझो इसे डोर कमजोऱ
है जरूरत तो बस सम्बोधन की
मधुर रिश्तों में, आपसी तालमेल की,
नहीं कानून कोई सहारा
पाने का मोहक रिश्तों से छुटकारा
नन्हें फूलो का क्या कसूर
बरगद की पेड़ सी छाया हो तुम,
रिश्ते तो है अनमोल
यूँ कागजों पर रिश्ते खत्म नहीं होते
हसीन पल जो बिताये साथ
वो भुलाये नहीं जाते
रिश्ते है अनमोल
सहेज लो इन्हे वक़्त से पहले
बोझ नहीं ये नन्हें फूल
मुरझा गए जो ये कभी
खिल ना पाएंगे कभी
रिश्ते है अनमोल
निकेता पाहुजा

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