Home
About
Contact
Privacy policy
रश्मिरथी
मुख्य पृष्ठ
मासिक प्रशस्तिपत्र
रचनाएं भेजें
हमारे विषय में
मुख्यपृष्ठ
Rashmirathi
जबसे उनकी सूरत
जबसे उनकी सूरत
नवंबर 30, 2021
जबसे उनकी सूरत ख्वाबों में सजने लगी है
हर रात आंखों ही आंखों में कटने लगी है
दिल अपनी एक अलग दुनिया बसाने लगा है
हर सांस अब तो उनके ही गीत गाने लगी है
हरिशंकर गोयल "हरि"
एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ
0 टिप्पणियाँ