ओ चंदा तू क्यों छुप गया 
क्या तुझे डर है  किसी से
या सुकून से सोना चाहता है
एक दिन अकेले में
अमावस के बहाने से
चढ़कर तिथियों की सीढ़ियां
पूर्णिमा के शिखर पर पहुंच कर
प्राप्त कर लेता है अपनी संपूर्णता को
विश्व को अपनी अनुपम छवि दिखा कर
उतरता है एक एक सीढ़ी पर कदम रख कर
पंद्रह दिनों तक लगातार उतरते हुए
अंत में सो जाता है अंधेरे कमरे में
अमावस की रात को सुकून की नींद
अगले दिन फिर से चढ़ने के लिए
उन्नति की सीढ़ियां 
उतार चढ़ाव की तेरी जिंदगी
हमें सबक दे रही है
कि कुछ भी स्थाई नहीं है जगत में
ना सुख और ना दुख

संगीता शर्मा