याद तेरी बहुत मुझको आती सनम 
पर मैं कहती हूँ कि याद आती नहीं।
रोते रोते न बह जाए काजल मेरा 
इसलिए अब मैं काजल लगाती नहीं।

सिसकियों से सराबोर मन,
मन मे रहती सदा उलझन।
न उमंगे तरंगे दिखे,
न ही ख्वाबो से हो संगम।
दिख न जाओ मुझे तुम किसी राह पर,
इसलिए अब कहीं भी मैं जाती नहीं।

देखती है नजर तुम दिखे,
पल में दिखते हो पल में छुपे।
पर नहीं तुम नजर पर टिके,
हो जाते कहाँ हो ओझल।
मिल के फिर अब कभी खो न जाओ कहीं,
इसलिए खोजने तुमको आती नहीं।