डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उत्तर पुस्तिका देख लिखे एग्जामिनर-एक्जामिनी इज बेटर दैन एग्जामिनर
कायस्थ कुल शिरोमणि देश रत्न,
डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी भारत रत्न।
बिहार प्रांत का 1 जिला सिवान,
छोटा सा गाँव जहाँ जन्मे महान।
हर जिह्वा को रटा हुआ ये ग्राम,
जीरादेई है उनके गांव का नाम।
पढ़ने में अव्वल आते थे कक्षा में,
इनके जैसे नहीं था कोई कक्षा में।
विश्वविद्यालय में भी थे ये बेजोड़,
विद्यार्जन में ये सबको पीछे छोड़।
परीक्षा में उत्तर देख लिखे एग्जामिनर,
एक्जामिनी इज बेटर दैन एग्जामिनर।
पटना हाई कोर्ट में किया वकालत,
नाम कमाया व कमाई धन दौलत।
स्थिति देखे कैसे है दीन-हीन भारत,
मन में ठानी लिखनी है नई इबारत।
मन घबराया देश हेतु सबकुछ छोड़े,
स्वातंत्र्य समर में कूदे खुद को जोड़े।
अपने निज हित की किये न परवाह,
देश वास्ते त्यागा पद पैसा की चाह।
दिल में राष्ट्रप्रेम की अलख जलाकर,
भाव विभोर रहके कर्तव्य निभाकर।
जनता को स्वातंत्र्य संग्राम से जोड़ा,
अंग्रेजों से लोहा लिए जेल रहे थोड़ा।
भारतीय संविधान करवाया निर्माण,
दलितों,पिछड़ों का किया कल्याण।
भारत प्रथम राष्ट्रपति पाके हुआ धन्य,
1रू.वेतन लेते,शेष देश को देदेते धन।
इतने सज्जन व निर्मल ह्रदय के अपार,
देशरत्न बाबू जी सपनें हों अब साकार।
चित्रांशी हर नर-नारी का कोटि-2 नमन,
राजेंद्र बाबू के जयंती पर शत शत नमन।
रचियता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

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