हर-एक फौज को नमन करुँ मैं,
जय बोलूँ हिंदुस्तान की...
आऊँगा फिर याद दिलाने,
सोर्य ये बलिदान की......

रात-दिन सैनिक जाग रहे,
और हम जीतें हैं शान में...
आओ मिलकर दुंआ करें,
हम सब अपने भगवान से...
आऊँगा मैं याद......

जब-जब दुष्मनों नें नापाकी की,
तब-तब "रावत जी" जैसे कमान बने...
अलग-थलग करते गये बंबारी से,
"सर्जिकल" भी सीमा पार की...
आऊँगा फिर याद......

ना हम लड़ते ना लड़ना चाहते,
आपस में मेल से रहना चाहते...
गर कोई आँख-बिचौली खेले तो,
कसम है भारत की आन की...
आऊँगा मैं याद......


  ✍️ विकास कुमार लाभ
           मधुबनी(बिहार)