जासूसी भी गजब की कला है।
ये ऐसी वैसी नहीं बड़ी बला है।
एक जासूस को करना पड़ता।
कैसे-2 काम पता तब चलता।
कभी भेष बदल आप में रहता।
कभी स्वयं मुखबिर से मिलता।
तरह-2 की आफत में ये फंसता।
खतरे लेता मोल जासूसी करता।
लक्ष्य प्राप्त कर लेता ही जासूस।
बड़ा सयाना होताहै यह जासूस।
तरह-2 के पांसे सामने फेंके यह।
मिलकर करे दोस्ती झांसे में यह।
बात-2 में जानकारी निकल लेते।
छुपी हुई हर चीज खंगाल हैं लेते।
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग है रॉ।
आर एन काव कभी थे प्रमुख रॉ।
पिक्चरों में देखें कैसे काम करता।
कभी भिखारी कभीपागल बनता।
कभी शोफर कभी शिकारी बनता।
कभी गैंग में गैंगेस्टर बनके चलता।
जासूसी का काम बड़ा ही अजीब।
असली पुलिस अफसर का करीब।
कभी बनाता है किसी को माशूक।
यही सब काम करता एक जासूस।
जासूसी की ट्रेनिंग लेता है जासूस।
कैसे क्या करना हैये सीखे जासूस।
अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से करता काम।
कुछ दिन में ही करता उन्हें धड़ाम।
देश द्रोही जो हैं उन्हें पकड़वाता है।
देशके दुश्मन को जेल भेजवाता है।
नशाखोरी के स्मगलरों पर है भारी।
मूर्ति चोरों स्मगलरों पर होता भारी।
एक जासूस सच्चा देश भक्त होता।
बुरे काम वालों का दुश्मन है होता।
आँधी फ़िल्म तो देखी होगी अच्छी।
जासूसी हुईहै इसमें कितनी अच्छी।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ प्र

0 टिप्पणियाँ