एक बार हाथ कि पांचों उंगलियां झगड़ा करने लगी,,,पहली अंगुली कहती हैं मेरे बिना तुम लोग कुछ भी नही जब भी किसी को डराने-धमकाने का काम करना हो तो मुझे ही आगे किया जाता हैं ,कुछ सोचना समझना हो तो मैं ही दिमाग को इशारा करती हूं।
तभी दूसरी अंगुली चिढ़कर कहती हैं,,अरे अरे तू ये क्यों भूल गयी ,किसी भी शादी समारोह में मुझे अधिक सजाया जाता हैं,,
तीसरी अंगुली कहती हैं,,मैं तुम सबसे बड़ी हूँ तुम सब मेरे पहरेदार हो ,मेरी ऊँचाई भी तुमसब से बड़ी है।
चौथी अंगुली कहती हैं ,,तुम लोग मुझे भूल गयी मैं भले ही दिखने में छोटी हुँ लेकिन सबको हाथ जोड़कर अभिवादन करना हो या हाथ मिलाना हो ,,मेरा मिलना सबसे जरूरी हैं,,इसलिये मैं ज्यादा जरूरी हुँ।
अंगूठा चुपचाप सबकी बातें सुनता रहा....फिर प्यार से कहता हैं तुम लोग ये क्यों भूल गयी ,कि मेरे बिना तुम सब कुछ नही हो,,किसी भी काम मे मेरी जरूरत हमेशा पड़ेगा।
अंगुलिया बोली तो तुम ये कहना चाहते हो कि तुम बड़े हो ,,?
नही बहनों मैं भी बड़ा नही क्योंकि मैं अकेला भी तुम्हारे बिना कुछ नही....।
हम सब मिलकर एक मुट्ठी बनती हैं ।उसी तरह हमारे देश कि राष्ट्रीय एकता जरूरी हैं।भले ही इसमे अनेक जाति धर्म के लोग हैं लेकिन देश के निर्माण जाति धर्म से नही अच्छे इंसान से होता हैं।
शारदा योगी(स्वरचित)

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