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माँ की आंखों से अश्क बहे, हाँ बापू का दिल टूट गया।
सब रिश्ते नाते तोड़ दिये, वह रंग लहू का बदल गया ।।
माँ की आंखों से अश्क---------।।

अरमां दिल के सब दफन हुए, सब सपने जलकर राख हुए।
गम, दर्द, शोक उसे कुछ भी नहीं, वह सबके दिल को तोड़ गया ।।
माँ की आंखों से अश्क --------------।।

यहाँ भाई - बहिन और यार सभी के, चेहरों पर है मायूसी।
चट्टानी बन गया वह दिल अब, वह छोड़कर घर को निकल गया।।
माँ की आँखों से अश्क-------------।।

आवारा, पागल, मतवाला और दीवाना है कलियों का।
वह देखकै खूबसूरत को, मुहब्बत बचपन की भूल गया।।
माँ की आँखों से अश्क-----------।।

वीरान हुआ गुलशन यहाँ, मरघट बना घर का आँगन।
लहू से किया था रोशन जिसे, चिराग आज वह बदल गया।।
माँ की आँखों से अश्क --------------।।

उनके रुदन को देखकै दिल, आंसू अपने बहाने लगा।
नहीं देखा अब तक ऐसा दिल, जो कत्ल अपनों का कर गया।
माँ की आँखों से अश्क-------------।।

अहसान फरामोश ,गद्दार है वह, ईमान को उसने बेच दिया।
वीरान है वह आबाद चमन, वह सूरत घर की बदल गया।।
माँ की आंखों से अश्क-------------।।



रचनाकार एवं लेखक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद