खुद रहते है वो खुले पर्वत पे
अपने भक्तो को सर पे छत देते है
मिट जाती है हर मुश्किल ज़िन्दगी से
जो हम मन से शिव की आराधना करते है
नहीं भाता मेवा हमारे भोले भंडारी को
भाँग धातुरे की मतवाले कहलाते है
दूर होजाते है हर परेशानी ज़िन्दगी से
जो हम मन से शिव की आराधना करते है
नहीं भाते शिव शंकर को रंग सुघन्दित
केवल भस्म मे रंगे हमेशा रहते है
दूर होती है हर अंधेरा जीवन से हमारे
जो हम मन से शिव की आराधना करते है
देदिया भक्तो को हर सवारी नाथ ने
खुद नंदी की सवारी किये घूमते है
मिटा देते है शंभू हर गम ज़िन्दगी से
चलो हम हाथ जोड़ कर बिनती करते है
बाँट दिया देवो मे अमृत का प्याला
कर विषपान नील कंठ भोले कहलाते है
मिटा दें जो हर दिल से कड़वाहट ज़िन्दगी मे
जो हम मन से शिव की आराधना करते है
कुमार कार्तिके और गणेश कज पिता प्यारे
माँ सती के स्वामी देवो मे हमारे महादेव है
करते है रक्षा हर भक्तो की अपनी हमेशा
जो सच्चे मन से इनकी आराधना करते है....!!
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नैना.... ✍️✍️✍️

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