तुलसी अदरक इलायची, डाल जब चाय बनाए।
कैसा भी सिर दर्द हो, क्षण में दूर भगाए।।

जब बनकर मेहमान कोई, मेहमानी में जाए।
खाना-पीना बाद में, स्वागत चाय कराए।।

गर्म चाय के साथ में, परांठा भी खूब सुहाए।
हो अमीर या गरीब कोई, मन सबका चाय लुभाए।।

चाय की टपरी पर जब, चार दोस्त मिल आएं।
हो कितनी भी उदासी, चेहरे सबके खिल जाएं।।

परेशान करे जब बात कोई, अनिद्रा हमें सताए।
बस एक कप चाय, रात भर मीठी नींद सुलाए।।

अॉफिस में काम करके, जब बदन अकड़ जाए।
मिले एक कप चाय का, दिन भर की थकान मिटाए।।

सर्दी के मौसम में, चाय बड़ी मन भाए।
गर्मी में नुकसानदेह, फिर भी मन ललचाए।।

बिस्किट हो नमकीन हो या गरमागरम पकोड़े।
हो जाएं बीमार मगर हम चाय कभी न छोड़ें।

विकट हुए बीमार हम, पर चाय न छोड़ी जाए।
चाय छोड़ पानी पियो, डॉक्टर भी सलाह बताए।।

चाय के हम आदी हैं, पीने के ढूंढें बहाने।
चाय हमारा प्रेम है, हैं हम चाय के दिवाने।।



लेखिका :- रचना राठौर ✍️