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इन्सान शुरू से बेहद फ़ितनासिफ़त रहा है । उसे सब कुछ जानना है । एक ओर धरती के पेट में क्या है, यह जानने और फिर उसे निकालने में वह दिन-रात एक किए रहता है, दूसरी तरफ़ चांद-सितारों के पार क्या है इसके लिए बेचैन रहता है । जो कुछ छुपा हुआ है, जो कुछ अदृष्ट है वह सब उसे देखना है, जानना है । जानने की यह चाह ही जासूस की राह बनती है । सामान्य जिज्ञासा रखने से समझदारी के दरवाज़े खुलते हैं और किन्हीं निजी दायरों के भेद जानने कोशिश से जासूसी की कहानी बनती है । इन दायरों की सीमा किसी देश की सरकार और राजनीतिक दल से लेकर घरानों, परिवारों और एक व्यक्ति विशेष तक भी सीमित हो सकती है । दुनिया के सबसे पुराना पेशा देहव्यापार कहा जाता है । हमारा मानना है कि जासूसी को भी इसी श्रेणी में 
रखा जाना चाहिए ।

किसी के भेद लेना,टोह लेना, गुप्तचरी करना जैसी क्रियाओ के लिए हिंदी में जासूसी सबसे ज्यादा लोकप्रय सब्द है हिंदी में जासूसी सब्त की आमद फारसी के जरिये हुई है मगर यह सामी मूल का सब्त है अल सईद एम बदावी अरबी इंगलिश डिक्सनरी ऑफ़ कुरानिक यूजेज के मुताबिक इसका अर्थ हाथो से पारीक्षण करना, जांज करना झांकना ढूढ़ना, तलाशना, टोह लेना, भेद लेना, छान बिन करना जैसी बातें है, यह ध्यान देने योग्य है कि ये सभी बाते किसी की निजता के दायरे में करने का आशय है इस धातु में निहित है आज जिस अर्थ में जासूस सब्द का परयोग होता है निच्छित ही उसका बिकास राजनीति के इतिहास के साथ साथ हुआ जासूस सब्द अरबी की जिन सिन धातु से बना है बादवी ने इसके लिए j, s, s का प्रयोग किया गया है जबकि अंद्रास राज्यकी इसके लिए      g, s, s का प्रयोग किया गया है हालाँकि दोनों ही संस्थानों पर जवणरन का ही संकेत है। 

जासूसी के अलावा हिंदी में भेदिया सब्द भी है जो बना है संसकीर्त धातु भेद्र से जिसमे दरार, बाँटना, फाड़ना, विभाजित करने जैसे भाव है दीवार के लिए भत्ती सब्द इस मूल से आरहा है कोई भी दीवार दरसल किसी सस्थान को दो हिस्से में बांटती है एक समूचे मकान की दीवार विभिन्न पारकोस्ट का निर्माण करती है भेद,भेदन,भेदना जैसे सब्द भी है भेद्र से तैयार हुए है रहस्य के अर्थ में जो भेद है उसमें दरसल आंतरिक हिस्से में स्थित किसी महत्त्वपूर्ण बात का संकेत है जो उजागर नही है जाहिर है इस बात को रहस्य की तरह माना गया,इस लिए भेद का एक अर्थ गुप्त या रहस्य की बात भी है भेद भाव का उजागर करने के लिए उस संस्थानों पर भेदने की कीर्या जरूरी है, ताभी वह गुप्त बात 

समझ मे सामने आयेगी  भेदिया सब्द भी इसी धातु से तैयार किया है जिसका एथ
अर्थ है जासूस भेदने वला कई बार प्रकार आंतर फर्क आदि के अर्थ में भी भेद सब्द का प्रयोग होता है बात वही निभाजन की है किसी चीज के जितने बिभाजन होंगे ,उसे ही भेद कहेंगे जैसे नायिका भेद यानी नायिकाओ के प्रकार फुट डालने के अर्थ में भेद डालना मुहावर भी है प्रचलित है दीवारों के भी कान होते है जैसे कहावत में दीवारों में के पीछे छुपाने वाला और वहाँ बसने वाला भेट का ही तो संकेत मिलता है अर्थात दीवारे भी जासूस करती है। 

संस्कृत का गुप्तचर सब्द हिंदी की  सस्तम सब्दवाली में भी जासूस के अर्थ में मौजूद है यह बना है ग्रुप धातु से जिसमे राक्षा करना बचना,आत्मरक्षा जैसे भाव तो है ही साथ ही इसमें छुपना छुपाना जैसे भाव भी है गौर करे कि आत्मरक्षा कि खातिर खुद को। बचना है छुपना ही पड़ता है मल्ल युध्य के दावे पेच आधक से बचने की राक्षाबिधि ही दवा पेच है राक्षा  के लिए चाहे युद्ध आवस्यक हो किन्तु वहां भी शत्रु के वार से खुद को बचाते हुए ही मौका देख कर उसे परस्त करने का पैंतरे आजमाने  पड़ता है यू बोल चाल में गुप्त सब्द का अर्थ होता है चूपया हुवा अदृश्य गोपन गोपनीय गुपुत जैसे सब्द इसी मूल से आरहे है प्रचीन काल मे गुप्त एक नायिका होती थी जो निसा अभीसार की बात को छुपा लेने में पटु होती थी इसे रखैल या पति की सहेली की संज्ञा भी जासकती है गुप्त की ही तरह गुप्त से गुप्त भी बना है जो एक छोटा तेज धार वाला हथियार होता है इसका यह नाम इसीलिए पड़ा है क्योंकि वस्र परिधान में आसानी से छुपाया जा सकता है।

गुप्त और  चर दोनों से मिलकर बना है गुप्ताचर जिसका का शब्दिक अर्थ हुआ छुप छुप कर  चलने वाला गुप्तचर में जो मूल्य भाव है वह है खुद की पहचान को छुपाना न कि चोरी छिपे चलना खुद को छुपाने से बड़ी बात है खुद की पहचान को गुप्त  रखते है हुए लोगो के बीच रहना उठना ये अ
सब बातें चर में निहित है राजनय और कूटनीति के  क्षेत्र में गुप्त चारि का महत्व सवार्धिक होता है जहा एक अधयापक एक चिकित्सक एक सिपाही,एक सब्जीवाला,नाई, ग्रहणी गर्ज यह कि कोई भी जासूस हो सकता है यही है गुप्तचर का असली अर्थ।
,,,,,,,,,स्वरचित,,,,,,,,🌼🌻🎄🌹🌼🌻🎄🌹,,,,,,प्रितम वर्मा✍️✍️🌹🌹🎄🎄🌻🌻🌼🌼