छोड़ दे उन राहों को 
जो तुझे भरमाती है 
तू मेहनत कर फिर देख 
सफलता कैसे पीछे आती है l

बढ़ चल शनै : शनै :
तू अपनी श्रम की राहों पर 
कर हिम्मत 
आगे बढ़  
देख कैसे 
अथक परिश्रम करते करते 
चींटी चलती जाती है 
बार बार हार कर भी 
हार नहीं वो मानती है 
राह जैसी भी हो 
पूरी ताकत और हिम्मत से 
सफलतापूर्वक बढ़ती जाती है l

मत डर 
मत हार 
कर हर चुनौती तू स्वीकार 
कि 
सच्ची कोशिश ही 
एक दिन रंग लाती है 
देख कैसे 
पत्थर की मज़बूत जगत पर 
बार बार आती जाती रस्सी 
सफलता के प्रेरक निशान छोड़ जाती है l

निराश न हो 
न हो उदास 
भाग मत 
सोच 
विचार कर 
कि कमी कहाँ रह जाती है 
भगवान भरोसे मत बैठ 
आलस छोड़ 
उठ खड़ा हो 
कर सुधार 
देख कैसे
तूफ़ान के बाद 
घरौंदा टूट के बिखर जाने पर भी 
तिनका तिनका जोड़ कर 
नए सिरे से 
पक्षी भी तो आशियाना फिर 
बसाते है l

छोड़ दे उन राहों को......... 


 स्वरचित एवं मौलिक
सुनीता कुमारी अहरी