संबंधों के षडयंत्रों से कब कौन यहां बचा है।
इतिहास गवाह है चक्रव्यूह अपनों ने सदा रचा है।
भरी सभा में कुल वधू तब ही अपमानित होती है।
जब भीष्म प्रतिज्ञा लेने वालों ने भी मौन रखा है ।
बन बैठे अर्जुन के सारथी कुरूक्षेत्र में नटवर ,
विचारो क्यों मुरलीधर ने गीता का पाठ पढ़ा है ।
सूरज की आभा को ,बादल जब भी ढंकना चाहे,
बनकर बूंदे आसमान से, धरा पर आकर गिरा है ।
विनय की भाषा समझने वाले सभी कहां होते हैं ,
सत्तांध मूढ़ अभिमानी को शास्त्र पढ़ाना विथा है ।
.…... स्वरचित :
पिंकी मिश्रा भागलपुर ( बिहार )

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