एक आस है हम सबको कोई भी अन्याय न हो।
अदालत की न्याय तराजू से कोई अन्याय न हो।
हरेक मनुज के न्याय हेतु ही होती हैं ये अदालतें।
सही गलत को सुनती हैं निर्णय देती हैं अदालतें।
माननीय कहलाती हैं ये इसी लिए हर न्यायालय।
जनता में उम्मीदें होती ये न्याय करेंगे न्यायालय।
झगड़े झंझट बेईमानी अवैध कब्जे व फौजदारी।
चोरी कत्ल लूट आगजनी एक्सीडेंट जिम्मेदारी।
इन सबसे जो होते पीड़ित न्यायालय ही जाते हैं।
राजनैतिक दर्ज मुकदमें भी अदालत ही जाते हैं।
यही एक विश्वास योग्य बची है ये न्यायपालिका।
माननीय विद्वान न्यायाधीशों से है न्यायपालिका।
सच-झूठ की लम्बी लड़ाई यहीं पे केवल चलती।
गवाहों और सबूतों के बल काफी दिन है चलती।
एक घाट का पानी पीते आके यहाँ अमीर गरीब।
सच्चा न्याय सभीको मिलता जो जिसके नसीब।
लोगों की दी पीड़ा को सहता है पड़े-पड़े रोता है।
किसी गरीब के साथ कभी अन्याय नहीं होता है।
कितना ही जोर लगाएं जल्दी बिकता न्याय नहीं।
कभी-2 जज के जान पे आफत भी आईहै कहीं।
मामूली सजाएं उम्रकैद एवं मृत्युदंड भी होता है।
अपनी करनी का फल भोगे करने वाला रोता है।
सच की होती जीत सदा व झूठ हार ही जाता है।
न्याय के इस तराजू से पापी तो सजा ही पाता है।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़सिटी,उ.प्र.

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