इंद्रधनुषी पंख सजाए, कभी बसंती कभी नारंगी रंग रंगीली आती हैं।
छुई मुई सी नाज़ुक हैं, कभी दमकती कभी चमकती,
कितनी सुंदर कितनी कोमल, फूलों पर मंडराती हैं।
परियों जैसे पंख है इनके, फूल फूल का रस पीतीं हैं।
सतरंगी कर सबके मन को दूर कहीं उड़ जाती हैं।
तितली रानी बड़ी सयानी सबके मन को भाती हैं।
प्रिया धामा
भिलाई, छत्तीसगढ़

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