पशु पक्षी भी मांगते है
बराबर का अधिकार
इन्साफ के तराजू पर
चलो तोलते है आज 

क्यूँ सदियों से मानव 
पशु पक्षियों पर
अपना अधिकार समझता आया
क्यूँ उन पर अत्यचार करता आया

मारा गया, काटा गया,
गाड़ियों के नीचे कुचला गया 
क्यूँ हर बार इनको
बेदर्दी से पीटा गया

स्वछन्द उड़ते हुये पक्षी को
क्यूँ पिंजरें मे कैद किया
अपने शोंक की खातिर
क्यों तीरों से वार किया

इनको भी होता है दर्द
कैसे भूल गया इन्सान
इनके भी आँसूं निकलते
कैसे रह गए हम अंजान

कभी खेतों मे हल चलवाये
कभी इनसे बोझ उठवाये
कभी सर्कस मे खेल दिखाएं
कभी तो इनपर कोड़े बरसाये 

आओ मिलकर कसम खाएं
इनको इनके अधिकार दिलाएं 
इन्साफ के तराजू मे
मानव के बराबर बिठायें

कविता गुज्जर