बिखर जाते हैं फिर होकर चूर चूर
कभी बहक जाते हैं शब्द काँटों की तरह
चुभते हैं फिर दिल को जैसे हो शूल
चटके रिश्ते फिर कभी न एक हो पाते हैं
बहके शब्द दिल में घाव बना जाते हैं
रिश्तों और शब्द दोनों को संभाल कर रखना चाहिए....
नेहा शर्मा

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