अपनों की खुशियों में जो लगा वह निवेश,
 जो दिखावे में लगा वह कारण है क्लेश।

जो कमाया और खा लिया खुद ही,
 सुख ना मिलेगा उससे तनिक भी लेश।

कमाई से अपनी किसी जरूरतमंद को दोकुछ जरूर,
 वही धन घर में रहता है सर्वश्रेष्ठ ।

नदियां ,ऋतुएं ,धरती भी तो मिल बैठकर है खाते,
 तुम्हारा तो किया कुदरत ने खुद अभिषेक ।

कुदरत के कर्ज को उतारो दान देकर 
 पर दान दो उसी को जो हो उसके पेश।

चलो आज से शुरुआत करें एक अच्छे काम की ,'सीमा'
आज से ही करें खुशियों का श्री गणेश।
स्वरचित सीमा कौशल यमुनानगर हरियाणा