मेरे घर की हवाएँ
तेरे घर की ओर हो
मैं भी आ जाऊ वहाँ
जहाँ मेरे कलेजे की कोर हो
दिखे या ना दिखे
महसूस कर लूँ उसे
हवा की सरसराहटो में
फिर मोर पपीहे की आवाज हो
रिमझिम रिमझिय बारिश में
तेरी यादों संग सुबह कीभोर हो ।।
गरिमा राकेश गौत्तम
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