हो जाए गर सूर्यास्त अगर
छा जाए अंधेरा चहुं ओर अगर
मन हो जाए विचिलित ये अगर
तो भी अपना धैर्य न खोना तुम...
सूर्योदय की नई किरणों के संग
जीवन में नए रंग भरना तुम
एक नई सुबह के साथ
एक नयापन लाना तुम
अपना धैर्य न खोना तुम...
कब रुकता है कोई समय कभी
चाहे अच्छा हो या बुरा सभी
ये याद हमेशा रखना तुम
अपना धैर्य न खोना तुम...
बदलाव ही जीवन जीने का
एक नया विकल्प होता है
सूर्यास्त के बाद हमेशा ही
सूर्योदय भी होता है...
प्रत्येक बदलाव से जीवन में
मिलती है एक नई सीख
किससे क्या तुम सीखोगे
ये तुम पर निर्भर करता है...
परिस्थियां चाहे जो भी हों
हर एक को अपनाना तुम
कभी विचलित न होना तुम
अपना धैर्य न खोना तुम...
कविता गौतम...✍️

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