मानो या ना मानो 
किंतु ये सच है
इंसान स्वार्थी हो गया है 
भूल गया अपनी संस्कार और संस्कृति को
इस कदर लालच के अंधी दौड़ मे शामिल हो गया है

मानो या ना मानो 
किंतु ये सच है
इंसान स्वार्थी हो गया है
खुशियों और गम को 
नफा और नुकसान मे तौलने लगा है

मानो या ना मानो
किंतु ये सच है 
इंसान स्वार्थवश रिश्तों की 
मर्यादा भूल गया है
गहन अपराध को जन्म दे रहा है

मानो या ना मानो 
किंतु ये सच है
स्वार्थी इंसान शिक्षित होकर भी 
अशिक्षित जैसा व्यवहार कर रहा है
क्रोध , लोभ , अहंकार वश
दूसरों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है


शिल्पा मोदी✍️✍️