पूछा किसी ने हंसकर कितने बरस की हो
 दादी ,नानी जैसी तो नहीं लगती।
  लगता नहीं कि तुम पर हावी हुई हो उम्र
 बालों में हल्की सी चांदी है कोई ज्यादा तो नहीं 
माथे पर सिलवटें है पर ज्यादा तो नहीं,
और त्वचा, त्वचा से तो तुम्हारी उम्र का पता ही नहीं चलता कितने बरस की हो, बस बता दो यार।
पर मैं सोच रही थी ,
जीवन के कितने बसंत गंवा कर
 खुद को आग में तपा कर,
बहुत से गमों को दिल से लगाकर,
 अपनी कश्ती  को बीच सागर मैं चला कर
अपनी गृहस्थी की नींव जमा कर,
 ये दादी नानी की कीमती जगह मिल पाई है मुझे।
और जब अपने हाथों से यह नन्हे परिंदे मुझे छूते हैं
 जब तोतली जुबान में मुझे बुलाते हैं
 जब डगमगाते हुए लड़खड़ाते हैं 
जब मम्मी पापा से बचकर मेरे आंचल में छुप जाते हैं
 तब जाने कौन से लोक में में घूम आती हूं 
और इस अविस्मरणीय सुख को केवल 
अपनें यौवन को नव रूप देने के लिए
 गवां दूं ये कीमती ओहदा,,
 ना  ना,, मैं लगती हूं पक्की दादी नानी जैसी ही 
बिल्कुल वैसी ही कसम से, 
हां हूं  मैं दादी भी नानी भी।
स्वरचित सीमा कौशल यमुनानगर हरियाणा