कहो नहीं किसी से तुम, कोई दर्द अपना।
सुनायेंगे दर्द तुमको, सभी अपना अपना।।
कहो नहीं किसी से--------------।।


कैसे सुनेंगे वो , तुम्हारी आवाज को।
भर नहीं सके जो, अपने ही घाव को।।
कैसे वो देंगे सहारा अब ,तुमको अपना।
सुनायेंगे दर्द तुमको, सभी अपना अपना।।
कहो नहीं किसी से--------------।।


फुरसत नहीं किसी को, कि पूछे हाल तुम्हारा।
छाया है सभी के दिल में, स्वार्थ का अंधेरा गहरा।।
कैसे करेंगे वो पूरा अब , तुम्हारा सपना।
सुनायेंगे दर्द तुमको, सभी अपना अपना।।
कहो नहीं किसी से -------------------।।


पहले उनको तो, बांट लेने दो खुशियां।
महका लेने दो उनको, अपनी बगियाँ।।
चाहते हैं सब किसी से यहाँ, बेफिक्र रहना।
सुनायेंगे दर्द तुमको , सभी अपना अपना।।
कहो नहीं किसी से----------------।।


साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)