रचना ---कैसे दू अंतिम विदाई
रचनाकार--सुमेधा शर्व शुक्ला


कैसे करूँ विदा तुमको,
तुम तो शान हमारी थी
बिखेर कर अपने सुरों का जादू
अनगिनत दिलो पर राज करती थी।।

जाति धर्म से परे,
सबके दिलो मे ,
अपना स्थान बनाया
नम थी आँखे सभी की,
जब सब ने तुमको मौन पाया ।।

माँ सरस्वती की बेटी थी,
स्वर कोकिला का तुझे नाम मिला,
बन गई हम सभी की दीदी
प्रेम का बन्धन सब से जोड़ लिया।।

तोड़कर सरहदों की सीमा,
खूब सम्मान कमाया,
व्यक्तित्व तेरा ऐसा था की,
दुश्मन ने भी तेरे आगे सीस नवाया।।

स्तब्ध है कर कोई
तेरे यू चले जाने से,
कैसे दे अंतिम विदाई अपनी 
स्वर साम्राज्ञी को।।

सदा के लिए विराम करके
कंठ को अपने,
वह कोकिला अपने धाम चली ,
माँ शारदे की बेटी थी ,
माँ शारदे के साथ चली।।