चलो आज दुश्मनों से दोस्ताना कर लेते हैं
छोड़ ख़ुशियों की ख्वाहिशें ग़मों से समझौता कर लेते हैं

उड़ने दो आज हर आँचल इन हवाओं में 
आंधियों से कैसा डर चलो तूफां से समझौता कर लेते हैं

गलियों में सिसकते हैं कई बच्चे भूख से देखो
चलो तक़दीर को छोड़ो अब रोटी से समझौता कर लेते हैं

कई दिनों से उंसने भेजी नहीं खबर भी अपनी
इन हदों सरहदों की खातिर इक माँ से समझौता कर लेते हैं

कई शिकायतें लिख रखी हैं मैंने तेरी अब तक
मैं ग़ैर मुस्तहक़ ही सही आज हक़ से समझौता कर लेते हैं

क्या-क्या साथ जाएगा सामां तुम जरा चुन लो
चन्द लम्हों का सफ़र चलो मंज़िल से समझौता कर लेते हैं

रचनाकार - अवनेश कुमार गोस्वामी