यही तो है वह सोने का खग।
जिसका है डगमगाया डग।
कनक बसा था जिसके रग।
फिरंगियों ने जिसे लिया ठग।
गोरी चमड़ी पर दिल से ठग।
धूल-धूसरित हो गया यह खग।
गवाह है इसका सारा जग।
ये चमके,दमके पुलके इसका रग।

                      -चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण