बेवफा वह नहीं समझे, उसका इंतजार करते हैं।
भरे जलसे में सूरत , उसकी तलाशा करते हैं।।
बेवफा वह नहीं समझे--------------------।।


हद भी होती है आखिर, किसी से बात करने की।
हमसे वह दूर है कितने, उम्मीद आने की करते हैं।।
बेवफा वह नहीं समझे-------------------।।


पर्दा हाथों से करके वह, बात करते हैं हमसे।
शर्माते हमसे बहुत है , शर्म हम यही करते हैं।।
बेवफा वह नहीं समझे-----------------।।


अपनी रूह के शब्दों से , खत उनको लिखा है।
नासमझ हमको कहते हैं, तारीफ हम उनकी करते हैं।।
बेवफा वह नहीं समझे------------------।।


खड़े हैं थामकर बाहँ, किसी की वह महफ़िल में।
और हंस रहे हैं हम पर , फिर भी हम अपना कहते हैं।।
बेवफा वह नहीं समझे -----------------------------।।


कभी कोई ख्वाब नहीं देखें , खुद को बर्बाद नहीं करें।
नहीं वफादार जुबां उनकी, फिर भी बदनाम नहीं करते।।
बेवफा वह नहीं समझे ------------------------------।।


साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)