सपनो का संसार हमारा घर प्यारा सपनो का साकार हमारा घर प्यारा।।

भरा पूरा परिवार हमारा घर
प्यारा,प्यार की बुनियाद मर्यादाओं
की दीवार, खुशियों का घर आंगन हमारा घर प्यारा।।

माँ ,बापू ,भाई ,बहन रिश्तों का संसार हमारा घर प्यारा भाव प्रेम के संबंधों संस्कृति संस्कार हमारा घर प्यारा।।

साथ संग भाई, बहन पढ़ते बढ़ते
जाने कितनी आशाओं का विश्वास
हमारा घर प्यारा।।

बहना का छुटा बाबुल घर खुशी आंसू गम में सिमट गया हमारा घर प्यारा।।

रोजी रोटी की खतिर भाई गए देश विदेश समय प्रगति से सीमित सिकुड़ता हमारा घर प्यारा।।

जहाँ रोजी रोटी बना लिया छड़ सीमेंट ईंट का एक छत वहीं पति पत्नी संतानों का न्युक्लियर फैमिली।।

प्यार परिवार अतीत कि याद न्यूक्लियर परिवार व्यवसायिक काल रिश्ते नातें औपचारिकता निर्वाह।।

छूटा गांव घर परिवार प्यार परवरिश भाव मात्र नाम माँ बाबू का हाल मिल जाता इंटरनेट मोबाइल सिमट गया प्यार परिवार सारा।।

माँ बाप भी छोड़ गए दुनियां प्यार घर
परिवार यादों का एक झरोखा अपने
हाल पे आंसू बहाता।।

अपना घर वीरान सा कहता अपने बसने और उजड़ने प्यार परिवार की भाषा।।

आज घर वीरान देखा अपना युग पीढ़ियों के बदलने का एहसास आंखे नम  दिल मे प्यार परिवार बसने 
उजड़ने कि विश्वास आशा।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।