इन फूलों को अभी, तुम खिलने दीजिए।।
बाल मजदूर इनको, नहीं बनने दीजिए।।
इन फूलों को अभी-------------------।।
अभी नाजुक-कोमल ,ये फूल हैं।
अभी नादान- मासूम, ये फूल हैं।।
मत तोड़ो इनका दिल, ऐसे तुम।
बहार चमन की, इनको बनने दीजिए।।
इन फूलों को अभी------------------।।
बुनने दो इनको सपनें, जीवन के।
चुनने दो इनको रास्तें, जीवन के।।
मंजिल इनको , इनकी खुद चुनने दो।
इनकी मंजिल पे , इनको पहुंचने दीजिए।।
इन फूलों को अभी--------------------।।
नहीं करावो मजदूरी, अभी इनसे तुम।
नहीं करो बालविवाह, अभी इनका तुम।।
बालविवाह-बालमजदूरी, एक महापाप है।
पढ़ने की उम्र है इनकी, अभी पढ़ने दीजिए।।
इन फूलों को अभी---------------------।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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