हमसब भिन्न भिन्न धर्मो के साथी।
एक महान देश  राष्ट्र के वासी हैं।।

ये हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई नहीं।
हमसब स्वतंत्र भारत के वासी हैं।।

जाति धर्म मत सम्प्रदाय अलग हैं।
रह रहे देश में यहाँ के निवासी हैं।।

त्यौहार भिन्न है पहनावा अलग है।
हमारी ये एकता अच्छी खासी है।।

एक दूसरे के धर्म का आदर करते।
त्यौहार में घर मिलने भी जाते हैं।।

प्रेम सौहार्द भाई चारे से हम रहते।
एक दूजे के घर निमंत्रण खाते हैं।।

हम पड़ोसी के सुख-दुःख में रहते।
बेटी बेटों के शादी में भी जाते हैं।।

बड़ी बीमारी एक्सीडेंट होते करते।
जरूरत पर रक्त भी  देने जाते हैं।।

भारत में रहने वाला  हर नागरिक।
एक समान हर सुविधाएं पाता है।।

रंग भेद नस्लभेद धर्म भेद न कोई।
शिक्षा रोजगार व्यवसाय पाता है।।

हर धर्म के लोग तरक्की करें यहाँ।
जिसे जो पसंद है भाता खाता है।।

साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखना।
हिंददेश ये भारत अपनी माता है।।

इस स्वदेश से कभी घात न करना।
इस मिट्टी में कफनदफन पाता है।।

देश को धोखे देना न गद्दारी करना।
जिस देश से जन्मों-2 का नाता है।।

हमसब भारत के रखवाले कहलाएं।
ये सौराष्ट्र हमारा है भारत माता है।।



रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.