खुदखुशी
जब मौत आती ही है, तो खुद को क्यों मारा जाए
जब एक न एक दिन जाना है, तो अभी क्यों मरा जाए ll

     मुश्किलों का तो नाम ही जिंदगी है, 
      तो हार के जाना क्यों, 
 जिनकी है उम्मीद उन्हें तोड़ कर जाना क्यों, 

फर्ज का कर्ज चुकाए बिना, 
बिगड़े हालातों को बनाए  बिना, 
आंसुओं को पोछे बिना, 

दुनिया मे आने के लिए कितने पैसे लगते हैं, 
    तो अपनी सांसे इतनी सस्ती , 
क्यों जिन्दगी को झूला देते हैं एक रस्सी पर, 
 सब है यहाँ तकलीफ मे , गम मे डूबे है, 
खुद कि हत्या कर के आत्महत्या मे जीते है। 
क्यों लेते हैं ये बोझ, 
मन मे भी ना लाए ऐसी सोच।