"जी पापा.. मुस्लिम चाचा का ये सपना आपके जरिए अवश्य पूरा होगा.. किंतु आप अभी किसी से उनके निवेश की यह चर्चा मत कीजिएगा.. कहीं फिर कोई ब्यवधान न हो जाए.. समय आने पर सबको जानना है..!" 
अर्चना ने अपनी बात पूरी कर ली! 

"हाँ बेटा!  वर्षों पहले तुम्हारी माँ ने भी कुछ ऐसा ही परामर्श दिया था..अब मैं शीघ्र ही इस क्रियान्वयन की योजना बना रहा हूँ.. स्वास्थ्य ठीक रहा तो पुनः मंदिर शिलान्यास के अवसर पर सबको एकत्रित करुंगा..!"

"पापा ये देखिए.. उमा दीदी ने ब्यूटी पार्लर खोला है.. पेपर में एड निकलवाई है.. दीदी का फोटो भी है.!".रानी ने चहकते हुए कहा! 

हाँ भईया के फर्नीचर का एड भी है यहाँ..अभिनव ने पेपर दिखाया! 

"अच्छा है न.. बेटा-बहू तरक्की करें तो माता-पिता को बहुत खुशी होती है..!" अर्चना ने खुशी जाहिर की! 

" हाँ बेटा! तू भी अपने दुकान पर बैठा कर.. मैं चाहता हूं हमारे तीनों बेटे सफल जींदगी जिएं.!" 

एक पिता के मन का उदगार निकल पड़ा! 

" मैं कन्टीन्यू कैसे जाउँ पापा..? माँ के साथ कई वर्षों तक हमने हास्पीटल का चक्कर लगाया.. अब आपकी सेहत ठीक नहीं है.. मुझे घर से बाहर जाते हीं आपकी चिंता होने लगती है. !" अभिनव ने अपनी बात पूरी की! 

"हाँ.. ! और अर्जुन भईया तो घर से बेफिक्र हैं.. तो अच्छा कमा लेते हैं.. आगे दुकान पीछे मकान ले रखा है कोई बात हुई तो  तुरंत हाज़िर हो जाएंगे..इधर तो दुकान पर जाएं तो इनका सारा ध्यान घर पे ही लगा रहता है.!"
रानी बहू ने अपना विचार ब्यक्त किया! 

"अच्छा! बेटा.. किराएदारों से हमें कितना मिल जाता है..?"
"पापा जी ने पूछा! 
आठ कमरे हैं पापा.. चालीस हजार मिल जाते हैं..!"
अभिनव ने कहा! 

" अच्छा बेटा! वो सब कमरे मैं तुम्हें सौंपता हूँ.. क्योंकि हमारा पेंशन तो हमारे साथ तक ही रहेगा.. वो ..तुम्हारा ब्यक्तिगत आय होगा.. !" पापा ने बहू-बेटे की समस्या को दूर करने का प्रयास किया! 

" हाँ पापा.. ये आपने बहुत अच्छा किया.. अभिनव भईया की कोई स्थाई अर्नींग नहीं थी अबतक..!"अर्चना ने प्रसन्नता जाहिर की! 

बहू -बेटे भी पापा के इस निर्णय से प्रसन्न हो गए..! 

अर्चना जाने की तैयारी में थी! रानी भाभी ने सील्क की साड़ी निकाली और अर्चना के बैग में डाल दिया! 

रहने दीजिए भाभी... मैं तो पापा से मिलने आती ही रहूंगी.. हर बार साड़ी  देने की आवश्यकता नहीं है!" 
अर्चना ने प्रतिकार किया! 
"अच्छा! माँ होती तो क्या तुम बिना साड़ी के जाती..माँ नहीं है तो क्या हुआ..मैं हूँ न.?"

बेटी -बहू की बातें सुनकर पापा जी की आंखे सजल हो गई! 

आप लोग बस पापा जी का ख्याल रखना.. इन्हें अकेले मत छोड़ना! भीगे पलकों से अर्चना अपने ससुराल चली गई! 


" किराएदारों का कमरा और  अच्छे से सजाया गया.. आगे पीछे पौधे भी लगाए गए.. 
कुछ दिन बाद वहाँ अभिनव का नेम प्लेट लगा!"  

धीरे -धीरे दोनों  बहू- बेटे को इस बात की भनक लग गई ..किराएदारों वाला कमरा पापा जी ने अभिनव को दे दिया है..! 

अर्चना पूजा कर के उठी तो देखा कि नीलू भाभी के कई मीस्डकाल थे.. अर्चना ने काल बैक किया तो नीलू ने फोन काट दिया! 

" सहसा अर्चना की नजर आज के पेपर पर पड़ी.. "अमन पैलेस "  अमन भईया ने घर ले लिया है.. पर किसी को बताया भी नहीं.. इतने सारे चीफ गेस्ट का  फोटो दिख रहा है.. पर पापा जी नहीं दिख रहे हैं.. शायद कहीं और होंगे..!" 

अर्चना अभी इन्ही खयालों में गुम थी  तबतक डोर बेल बजने लगा! 


"अर्चना ने  दरवाजा खोला तो सामने नीलू भाभी खड़ी थी! वाव भाभी  मैं आपही को याद कर रही थी...!" अर्चना ने हर्षातिरेक भाव से कहा! 

"हाँ अर्चना! मुंह मीठा करो.. तुम्हारे भईया ने अपना घर खरीद लिया है.. कल ही गृहप्रवेश था! सबकुछ बहुत जल्दी में हुआ इसलिए तुझे बुला नहीं पाई!"

" कोई बात नहीं भाभी.. हमने भी आज ही पेपर में देखा है.. बहुत सारे गेस्ट दिख रहे हैं यहाँ.. पर पापा जी की तस्वीर नहीं ली गई है..?"
अर्चना ने प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा! 

" अरे! कोई नहीं आया था अपनी फैमिली से.. आज ही सबसे मिलना है मुझे.. !"
ये मिठाई रख लो मैं चलती हूँ..!नीलू ने उठते हुए कहा! 
"आपने इनवाईट किया था भाभी किसी को..?"
अर्चना सीधे मुद्दे पर आ गई! 
नहीं.. जरुरी नहीं समझा हमने..!" नीलू ने बेफिक्र भाव से कहा! 
अर्चना ने नीलू को प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा.. ! 

"तुम तो सब जानती हो.. पापा जी ने अभिनव को किराए वाले घर का मालिक बना दिया है.. किसी से राय मशवरा तक नहीं किया पापा ने.. बेटे तो और भी दो  हैं उनके.. हमलोग तो अब तक किराये के मकान में थे.. हमारी फिक्र किसी को नहीं हुई..ये हमने पापा जी से ही सीखा है.!" नीलू ने अपनी पूरी भड़ास निकाल दी! 

"अच्छा! भाभी.. तो यही वजह है कि आपने किसी को नहीं बुलाया..?"
हाँ! जो समझ लो तुम! नीलू ने मुंह बनाते हुए कहा! 

" जैसे पापा जी से आपने सीख लिया वैसे आपने  अभिनव भईया से भी सीखा होता.. अपना सारा वक्त अभिनव भईया माँ और पापा के सान्निध्य में बिताए हैं.. आज भी पापा के सेहत की फिक्र अभिनव भईया  को ही है.. आपके पास तो वक्त ही नहीं है उनकी देखरेख करने के लिए.. जबकि सिटी से अधिक दूर नहीं है अपना घर..पापा के साथ जो रहता है पापा ने उसका अरेंज कर दिया तो क्या बुरा किया.?" 

अर्चना ने खरी-खरी सुना दिया! 
नीलू भाभी एक पल भी वहाँ नहीं रुकी..अपना पर्स उठाया और वैन में जा कर बैठ गई! 

" घर का लोकेशन बताईए मैम.?" ड्राइवर ने पूछा! 
कहीं नहीं जाना है अब.. अपने बंगलू पर चलो !"
" बाप - बेटी एक ही राग अलापते हैं शुरू से.. !" 
नीलू भुनभुनाती हुई जा रही थी! 

"अर्चना का मन खिन्न था.. उसने फिर पापा को फोन किया और बातें करने लगी.. अर्चना ने नीलू की कोई चर्चा नहीं की!" 

" नीलू ने घर पहुंचते ही नमक मिर्च लगा कर अमन को सारी बातें  सुनाई!" 

"कोई बात नहीं नीलू..मैं कल ही पापा को यहाँ लेकर आ जाउंगा!"
अमन ने सहज भाव से कहा! 

" अगली सुबह अमन अपने पुश्तैनी मकान पहुंचा.. कुशलक्षेम होने के पश्चात् पापा जी को  अपने साथ चलने का प्रस्ताव रखा!"  

" पापा जी सभी बच्चे आपही के हैं.. आप जाईए भईया के साथ.. मैं दो चार दिन में आ कर ले आउंगा आपको..!" 
अभिनव ने भईया का समर्थन किया! 

दोनों बेटों की सहमति के पश्चात्  पापा जी बड़े बेटे के आवास पर आ गए..!

क्रमशः-